पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर
Updated: Jul 28, 2025
By Dr Praveen Kumar Anshuman
पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर, हमारा किरोड़ीमल है ।
अद्भुत और अलौकिक इसका, कल, आज और कल है ।।
निर्मल भावना का उद्गार, प्रतिष्ठा में जिसके बसता है
निष्ठा, नीति और नियम सब, हर पल ही जो कहता है
जिसके दर्शन में छिपा हुआ, जीवन का अमृत जल है
जिसकी मिट्टी में खिलता, हर कच्चा कुम्भ कमल है
पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर, हमारा किरोड़ीमल है ।
अद्भुत और अलौकिक इसका, कल, आज और कल है ।।
कर्म, धर्म में निजता जिसकी, एक-एक पल में बसती है
परोपकार की परम धुरी पर, हर क्षण जो गति करती है
जिसके प्रांगण में प्रवेश कर, हो जाता हर पाँव प्रबल है
जिसकी महिमा गाते ही, हो जाती हर आँख सजल है
पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर, हमारा किरोड़ीमल है ।
अद्भुत और अलौकिक इसका, कल, आज और कल है ।।
नहीं रुकी है, नहीं रुकेगी, धारा जो हर पल बहती है
स्वर्ण-भविष्य की कथा पुरानी, सदा-सदा जो कहती है
जिसकी सुवास को पाकर, हर हृदय हो जाए धवल है
जिसके वातास में मुर्झाया भी, खिलकर हो जाए सबल है
पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर, हमारा किरोड़ीमल है ।
अद्भुत और अलौकिक इसका, कल, आज और कल है ।।
भारत-पथ पर चलकर जो, भारत-गाथा कहता है
जिसकी सरिता का जल, चहुँ ओर दिशा में बहता है
अनुपम दृष्टि में सृजन, करता जो एक सहस्रदल है
जिसकी उपमा मिलते ही, जीवन हो जाए सफल है
पुलकित, पुष्पित, पावन परिसर, हमारा किरोड़ीमल है ।
अद्भुत और अलौकिक इसका, कल, आज और कल है ।।
By Dr Praveen Kumar Anshuman

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