पुरानी एलबम
By Shobha Joshi
फुरसत के लम्हों में
बीते जो लम्हें हैं
उन पर एक निगाह डालूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
आंखें भरी हुई काजल से
टेढ़ी सी एक मांग निकली बालों में
छोटे से पैर सजे पायल से
मासूम सी मुसकान बिखरी अधरों में
बचपन खो गया कहीं
बचपना ढूंढ निकालूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
वो गर्मी की छुट्टियों में
नानी के घर जाने से लेकर
ननद का बच्चों संग घर आना
हिलमिल कर काम करना और
मिलजुल कर हुड़दंग मचाना
भरे पूरे परिवार की
खुशहाली का लम्हा
फिर से जी मैं डालूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
तीज त्यौहार शादी जन्मदिन
सैर सपाटा कोई या फिर
रोजमर्रा के साधारण से पलछिन
सब में छुपी कुछ बेशकीमती यादों को
अतीत में दबी हुई मन की मुरादों को
स्मृति से विस्मृत हो गयीं जो
वक्त की धूल से धुंधली हो गयीं जो
उनकी धूल साफ कर मैं डालूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
बच्चों के बचपने से लेकर लड़कपन तक
माँ की जवानी से लेकर बुढ़पन तक
और अपनी उम्र के इस दौर के मंचन तक
अंतर देख मुस्कुराऊं
खूब हंसू और हंसाऊं
उम्दा सी तस्वीरों की
जैसे प्रदर्शनी एक लगा मैं डालूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
कोई ऐसा भी है जो लड़ भी गया
कोई ऐसा भी है जो बिछड़ भी गया
कोई ऐसा भी है जो मन जोड़ भी गया
कोई ऐसा भी है जो मन को तोड़ भी गया
कोई ऐसा भी है जो ऐसा जुड़ा कि
अपना सत्व जीवन में निचोड़ गया
कोई ऐसा भी है जो कभी न आने के लिए
छटपटाता छोड़ भी गया
हर एक तस्वीर की कहानी याद कर
खट्टी मीठी यादों का मजमा सा मै लगा लूं
जी में आया कि
पुरानी एलबम को
आज बाहर निकालूं।
By Shobha Joshi

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