पुराना है सब कुछ!
By Prathamesh Samant
पुराना है सब कुछ,
फिर भी कुछ नया है...
जख्म है वही हैं,
मीठे दर्द का रांझ कुछ नया है...
दुनिया थोक बाज़ार है,
यहाँ अपनी भी एक दूकान है...
तकलीफें लेकर बैठे हैं,
यहाँ सिर्फ चैन बेचने का फरमान है...
पुराना है सब कुछ,
फिर भी कुछ नया है...
तकदीर अपनी रुसवा है,
लकीरों के निशान अब भी जावन हैं...
दुनिया का उसूल है,
रात के बाद आता नया सवेरा है...
लेकिन ये हम जानते हैं,
दिन के बाद आनी वही रात पुरानी है...
पुराना है सब कुछ,
फिर भी कुछ नया है...
By Prathamesh Samant

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