पुकार
- Hashtag Kalakar
- May 21, 2024
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Updated: Oct 2, 2024
By Bimal Kumar Saini
देखो आज का बुद्धिजीव मानव, कितना बदल गया।
अपने सुख के ख़ातिर, धरती और जीवों का सर्वनाश किया।
ज़हरीली कीटनाशक दवाई, रसायनिक खाद का इस्तेमाल किया।
हम जीवों को मारकर, फसलों को दुगना किया।
कई जीवों की प्रजातियां विलुप्त हुई, जीवमंडल को नष्ट किया।
फसलों की गुणवत्ता को छोड़, गिनती का गुणगान किया।
और खुद के जीवन में नई बीमारियों को न्योता दिया।
हमारे योगदान को तू भूल गया,
गौरैया ने टिड्डी को खाकर,
सोनपंखी ने कीटों को खाकर,
दुमोई सांप ने चूहों को खाकर,
केंचुए ने धरती को उर्वरक बनाया है,
फसलों को हम जीवों ने भी बचाया है।
अपने पूर्वजों से सीखो, नहीं किया उन्होंने ऐसा बर्ताव।
और नहीं होने दिया हमको दाने पानी का अभाव।
लेकिन आज के मानव में नहीं है कोई दया भाव।
क्या बिलकुल भी नहीं रहा हम जीवों से तेरा लगाव।
बेजुबान पर अत्याचार करके क्या सिखा रे तू मानव।
पूछ अपने आप से क्या इस कारण तू बुद्धिजीव मानव कहलाया।
ये सब करके अपने पूर्वजों को तूने क्या मुख दिखलाया।
क्यों हमारे जीवन में तूने मचाया है हाहाकार ?
क्या अब भी नहीं गया तेरा यह अहंकार ?
क्या अब भी रखेगा तू इन सबको बरकरार ?
आएगा एक दिन तेरे जीवन में भी ऐसा अंधकार।
इन सब बातों से ना कर तू इंकार।
हे मानव करो अपनी बुद्धि साकार।
खुली आँखों से देखो एक यह भी संसार।
इन सब ज़हरीली दवाओं का करो बहिष्कार।
जैविक खाद पर करो आविष्कार।
हम जीवों की यही पुकार।
हम जीवों पर करो उपकार।
जीना हमारा भी है मूल अधिकार।
हम जीवों की यही पुकार।
हम जीवों की यही पुकार।।
By Bimal Kumar Saini

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