पिता के जैसा किरदार नहीं है
- Hashtag Kalakar
- Dec 20, 2025
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By Sumita Kumari
पिता के जैसा किरदार नहीं है मां के जैसा दुलार नहीं है
है जगत में रिश्तों की भीड़,
लाख दोस्तों की बौछार हो जीवन मैं,इतना प्यारा कोई संसार नहीं है
समय पे खा लेना
पढ़ाई के बाद ,अच्छे से आराम करना,कपड़े गीले है
सर्द लग जाएगी
बाल गीले है
सुख कर सोना
बाहर की चीजें मत खाना, बीमार पड़ जाओगे,जायदा दोस्तों के साथ दूर न निकल जाना,
घर पे भी आराम करना छुट्टियां में,इन शब्दों में छुपा अथाह प्यार
कही और नहीं है
पिता के जैसा किरदार नहीं है मां के जैसा दुलार नहीं है
बचपन संवारा है,कितने तकलीफों के बाद भी,
मुश्किल रास्तों को आसान बनाया है,समय से सोना,समय से जागना,
समय की कीमत समझाया है जिन्होंने,
बचपन की नादानी
ये नहीं खाना
वो नहीं खाना
मन मुताबिक
हर दम न मिलेगा खाना
सेहत भी है बनाना
हमें बहुत खूबसूरती से समझाया जिन्होंने
पिता के जैसा किरदार नहीं है मां के जैसा दुलार नहीं है
ख्वाबों को हकीकत मे
तब्दीली का हौसला दिलाया है जिन्होंने
खुद फटे कपड़े में जीवन बिताया है जिन्होंने
पर हमें नए पोशाक त्यौहारों में दिलाया है जिन्होंने
हिमालय रूपी प्रहरी
अंदर से निर्मल
ऊपर से सख्त
अपने ही कंधों पर पूरी घर उठाया है जिन्होंने
मेहनत से घर को बनाया है जिन्होंने
कोई ओर नहीं ,कोई ओर नहीं
पिता के जैसा किरदार नहीं है मां के जैसा दुलार नहीं है
By Sumita Kumari

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