पिता के अल्फाज
By Priyanshu Ranjan
तेरी खुशियों के खातिर मैं खुद को खुशियों से दूर करता हूं और तेरी हसी के लिए मैं अपने दुख को मुस्कुराने पर मजबूर करता हूं बेटा तू परिवार का वंश है तुममे मेरा ही अंश है मैं कभी अपने दुखो का इजहार नहीं करता और बेटा तुझे बुरा कहता हूं इसका ये मतलब नही की मैं तुमसे प्यार नहीं करता जिंदगी में मेरे सारे दुख उस खुशी के आगे अधूरे होंगे जब तेरे हाथो से मेरे सारे सपने पूरे होंगे
दुख काट के पढ़ाया बचपन से सही राह दिखाया और तेरा सपना पूरा हो इस कारण मैंने तेरे हर ख्वाहिश को आग दिया और बेटा एक तेरी सफलता के खातिर मैंने अपना सब कुछ त्याग दिया यहां बेटे को प्यार से पुचकारा जाता है और बेटियो को जन्म से पहले ही मारा जाता है बेटा जब पढ़ लिख कर घर से दूर जाता है उस समय एक पिता बेटियो को ही सहारा पाता है बेटी तेरे आने की खुशी तो है पर मैं बता नहीं सकता बेटी तू जान है मेरी ये भी जता नही सकता आज के बच्चे की तरह तू भी बिगड़ न जाए बेटी इसीलिए थोड़ी डांट जरूरी है दहेज के कारण बेटियो को मारना हमारी मजबूरी है तेरे आने के बाद मैं अपने दुख को अलविदा करता हूं और बेटी आज मैं तुझे दूसरे घर विदा करता हूं इस देश में बेटे का जितना मोल है उससे ज्यादा बेटियां अनमोल है।।
By Priyanshu Ranjan

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