पापा की सिख…
By Anjali Sameer chimrukiar
पापाने मुझ को सिखलया, हिंमत कभी ना खोना तुम...
मुश्किलों से यूँही डर कर, देखो कभी ना रोना तुम...
हो जायेगा नया सवेरा, थक कर सो मत जाना तुम....
अंधरों में भी आंशाओं का, दिपक एक जलाना तुम…
मन की कमजोरी बस एक खलल है...
दुनियाँ मे बढकर बस आत्मबल है..
ठोकर लग जाये तो रुक मत जाना...
खुद के बल पर ही चलते रहना....
कठिनाईयों से ना घबराना, अपना मार्ग बनाना तुम...
अंधरों में भी आंशाओं का, दिपक एक जलाना तुम...
कभी किसिका दिल ना दुखाना...
कभी किसीको तुम ना रूलाना...
नेकी की राह पर ही चलते रहना...
मदद सभी की करते रहना...
मदद किसीने कर दी अगर तो, ये बात कभी ना भुलाना तुम...
अंधेरों में भी आशाओं का दिपक एक जलाना तुम...
कोशिशों से ही मंजिल मिलती है...
होसलों पर ही दुनियाँ चलती है...
सुख दुख जीवन का नियम है...
उम्मीदों पर ही दुनियाँ कायम है...
निर्बल जन का हात थामकर, आशाओं का सुर्य दिखाना तुम...
अंधेरों में भी आशाओं का दिपक एक जलाना तुम...
अंधेरों में भी आशाओं का दिपक एक जलाना तुम...
By Anjali Sameer chimrukiar

Comments