पहली मुलाकात
- Hashtag Kalakar
- Nov 30, 2025
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By Bhumika Haritwal
हाँ तो एक कहानी है,
ठिठुरती ठंड थी,
कोहरे की सफेद चादर में लिपटी धरती-
वो था और मैं थी।
मेरी नज़र उस नीरव जैसे कुहासे से गुज़र,
उस फीके चाँद तक पहुँची -
म्लान अधर, मंद नेत्र,
कुछ उखड़ा-सा चेहरा,
पर उसकी चुप्पी में
मानो कोई मधुर गीत गूँज रहा था।
निग़ाहें मिली- शायद दिल भी।
साँस जैसे थम-सी गयी।
मेरा शीतित तन,
उसके प्रेम से भीगे नयनों की उष्मा में
धीरे-धीरे तपने लगा।
अब, जब मैं चाँद-तारों की चादर तले,
उस दिन को लिख रही हूँ,
वही पवन बह रही है--
पर आज वह स्पर्श नहीं,
उस स्पर्श की स्मृति मुझे छू जाती है।
तब ज्ञात नहीं था,
फिर कब, किस मोड पर
उससे भेंट होगी --
सो, मैंने अपने नेत्रों में
उस क्षण को भर लिया था।
आज वही अधर याद आते हैं --
जो उसके अधरों से फूटते गीतों के साथ,
धीमे स्वर में गुनगुना चाहते थे।
By Bhumika Haritwal

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