पहली मुलाकात
By Kanchan Deora
अब जब याद आती है वो पहली मुलाकात
तो एक भीनी सी मुस्कान छलक आती है
कितना अजीब थी वो मुलाकात
सब्र जैसे कहीं खो सा गया था तेरा भी और मेरा भी
बस एक दूसरे को देखने की ललक
पहली बार जब तुम्हारी डीपी देखी
तो लगा था कौन है ये, क्यों खींची जा रही हूँ मै
वैसे इतना भी दरिया दिल नहीं है मेरा
बड़ा अड़ियल है जल्दी से आता नहीं किसी पे
पर यहाँ क्या कुछ खास था बस यही था मुझको समझना
यूं ही किसी सोशल साइट पे हमारा मिलना
वो पहली बार नम्बर सेयर करना
नम्बर होते हुए भी काल करने से पहले
मेरे पेट में तितलियों का उड़ना
बहुत कुछ था जो अजीब था
तो बहुत सारी हिम्मत जुटाई
और पहली बार काल लगाई
बातें बेशुमार होने लगी
ना जाने मै किन ख्वाबों मे खोने लगी
लगने लगने लगा जैसे मेरा अधुरा ख्वाब हो कोई
या वो चमकती किरन जिसके पीछे हमेशा से मै अपने सपने में हरदम दौड़ा करती हूं
हाँ वही वही तो हो तुम
कौन हो तुम, तुम जो हो बस उसी को चाहती हूं
अगर ये भ्रम है तो इसी भ्रम मे जीने दे मुझे
अगर ये मोहब्बत है तो कर लेने दो मुझे
जानती हूं एक रोज बिछड़ना है पर उससे पहले जी भर जी लेने दो मुझे
समझती हूं इस बार भी तुम हासिल नही मुझे
तो क्या थोड़ा कुछ और कदम साथ चल लेने दो मुझे
कुछ कदम बस कुछ और कदम साथ चलने दो मुझे
By Kanchan Deora

Comments