पहली मुलाकात
By Alka Singh
यूं बढ़कर पुकारा मुझे
कि आगोश में समा जाऊं,
देखा कुछ यूं उसने, मानो
उसे भी मेरा इंतजार था।
विशाल, विराट, अंतहीन, वो
घटती बढ़ती लहरों में,
एहसास कराता है मुझको
मेरे दीवानेपन का |
प्रथम मिलन ज्यों पी संग हो
था इतना प्यार भरा उसमे,
आया बढ़कर वो पास मेरे
लहरों संग छू गया मुझको।
एहसास मिलन का ये अब तो
जीवनपर्यत बसा रहेगा मन में
तुम अंतहीन, मैं क्षणिक,
तुम विशाल, और मैं इक कतरा।
यूं बढ़कर पुकारा मुझे
कि आगोश में समा जाऊं,
देखा कुछ यूं उसने, मानो
उसे भी मेरा इंतजार था।
विशाल, विराट, अंतहीन, वो
घटती बढ़ती लहरों में,
एहसास कराता है मुझको
मेरे दीवानेपन का |
प्रथम मिलन ज्यों पी संग हो
था इतना प्यार भरा उसमे,
आया बढ़कर वो पास मेरे
लहरों संग छू गया मुझको।
एहसास मिलन का ये अब तो
जीवनपर्यत बसा रहेगा मन में
तुम अंतहीन, मैं क्षणिक,
तुम विशाल, और मैं इक कतरा।
By Alka Singh

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