पहला स्पर्श
By Bhumika Haritwal
हाँ, तो एक कहानी है,
एक डायरी थी, जो प्रिय को बेहद प्रिय थी,
प्रिय उसे हर क्षण, हर लम्हा, आलिंगन में रखता।
प्रिय की श्वसन उस दैनिकी के हर पृष्ठ में एक मधुर गीत गा रही थी,
प्रिय की उँगलियाँ हर पन्ने पे अनुराग की मुहर छाप रही थी,
प्रिय की मधभरी आँखें, हर पृष्ठ को उलफ़त से मदहोश कर रही थी,
प्रिय के अधर, पृष्ठ को छूकर, प्रेम से सराबोर कर रहे थे।
मुझे उस डायरी से कुढ़न होने लगी,
मानो वह मेरी अनुपस्थिति का साक्ष्य हो।
एक रात, ईर्ष्या की आंच में मैं उसे उठा लाई -
हर पृष्ठ पलटते ही, प्रिय की सांसें मेरी त्वचा पर उतरने लगीं,
हर शब्द जैसे मेरे हृदय पर दाग बनकर बैठ गया।
मैं काँप उठी - यह प्रेम था या अपराध, नहीं जानती,
पर उस क्षण,
मैंने प्रिय को पहली बार छुआ नहीं,
बल्कि प्रिय मुझमें उतर आया।
By Bhumika Haritwal

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