पहला घूँट
By Rajesh Rawat
याद है मुझको आज भी वो दिन,
जब मैंने, शराब का ‘पहला घूँट’ पिया था I
ऐसे लगा था जैसे किसी ने,
गिलास में अमृत घोल दिया था I
सच कहता हूँ ऐसा मजा,
आया था उस दिन पीने में I
बरसात ने जैसे दिया हो राहत,
गरमी के महीने में I
‘एक घूँट’ से सुरु हुआ सिलसिला,
धीरे धीरे बढ़ने लगा था I
मैं नशे की सीढ़ियों पर अब,
हर दिन ऊपर चढ़ने लगा था I
हर वक्त शराब की बोतल को,
मैं रखता था अपने करीब I
जैसा था कोई अटूट रिश्ता,
शायद हम दोनों के बीच I
लगती थी ‘शराब की गंध’,
मुझको इत्र के जैसी I
सुख दुःख की घड़ी में ‘शराब’,
एक ‘परम मित्र’ के जैसी I
बेहोशी में ही सही,
जिंदगी मजे में कटने लगी थी I
शराब की हर बोतल मुझमें,
एक नई जान फूंकने लगी थी I
कमाने और खाने की अब,
नहीं रहती थी कोई फिकर I
रिश्ते और समाज का भी,
नहीं रह गया था, कोई डर I
होती थी, गाली गलौज और मारपीट,
कभी सुबह तो कभी शाम I
और, पीकर रास्तों में गिरना पड़ना,
अब, बात हो गई थी आम I
चिंता मुक्त जीवन मुझे,
बड़ा आनंद दे रहा था I
मैं शराब की हर बोतल को,
दिल से, ‘धन्यवाद’ दे रहा था I
फिर अचानक एक दिन,
बाजी सारी पलट गई I
मेरे परम मित्र ‘शराब’ की वजह से,
तबीयत मेरी बिगड़ गई I
अचंभित हो गया यह जानकर,
कि, मैं कैंसर का मरीज हो गया I
जिंदगी से अब बहुत दूर,
और मौत के बिल्कुल करीब हो गया I
मेरे परम मित्र ‘शराब’ ने,
कुछ यूँ दोस्ती का फर्ज़ निभाया I
‘मैखाने’ की कुर्सी से उठाकर,
‘अस्पताल’ के बिस्तर मुझे पहुँचाया I
घरबार और सभी रिश्तों को,
मुझसे अब दूर कर दिया I
दर्द से भरा और अकेला जीवन,
जीने को मजबूर कर दिया I
क्यों नशेड़ी लोगों की,
मैं भीड़ में शामिल हो गया ?
क्यों अपनी जिंदगी का,
मैं खुद ही कातिल हो गया ?
अस्पताल के बिस्तर पर अब,
पड़ा पड़ा मैं सोच रहा हूँ I
सच कहूँ तो मन ही मन में,
अपने आप को कोश रहा हूँ I
‘लोक कल्याण अस्पताल, कैंसर वार्ड’,
‘आईसीयू कक्ष और पलंग नंबर तीन’ I
अब यहाँ लेटकर गिन रहा हूँ,
जिंदगी के बचे हुए दिन I
यही है मेरा अब नया ठिकाना,
और मेरा एक नया पता I
वर्षों से ,शराब से दोस्ती रखने की,
मुझे मिली ये कठोर सजा I
‘शराब, सिगरेट, तंबाखू , गुटखा’,
आदत है इनकी बहुत बुरी I
वे लोग हो गए हैं बर्बाद,
जिन्होंने इनसे मित्रता की I
इस बात को समझने में,
मैंने बहुत देर कर दी I
लेकिन दोस्तों तुम ना करना,
जो गलती मैंने कर दी I
शराब, सिगरेट, तंबाखू , गुटखा,
‘सुखदायक’ नहीं, बल्कि ‘कष्टकारक’ है I
और सचमुच में इनका सेवन,
“स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है” I
काश ! इस चेतवानी को, मैंने गंभीरता से लिया होता,
काश ! इस लत को छोड़ने का, मैंने कुछ तो प्रयास किया होता I
काश ! बड़ों की नसीहत का, मैंने कुछ तो मान रखा होता,
और काश ! शराब का वो ‘पहला घूँट’, मैंने नहीं चखा होता I
तो आज पश्चाताप का आँसू ,
यूँ मेरी आँखों से ना बहता I
मेरे पास भी, जीने के लिए,
कुछ और अधिक साल, शेष रहता I
By Rajesh Rawat

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