पसंदीदा मर्द
By Prachi
सबने लिखा पसंदीदा औरत पर,
तो सोचा क्यों न हद कर दी जाए-
आज पसंदीदा मर्द पर लिखा जाए।
उसकी आँखें हो गहरी, जो मुझे पल में डूबा दे,
मैं आइने तोड़ दु सारे,
अगर वो मुझे अपने हाथों से सजा दे।
वो मेरी गोद में अपना सर रख कर सो जाए,
मैं उसके बालों में फ़ेरूॅं उॅंगलियाॅं-
और वो ख़्वाबों में खो जाए।
जब वो लबों को अपने खोले,
मैं उफ्फ न करूं जब वो अपने दिल की बात बोले।
प्यार लिए अपनी भारी सी आवाज़ में बस बोलता जाए,
मैं पलके न झपकू, जब-जब वो मुस्कुराए।
वो न बोले, मैं फिर भी उसे सताऊॅं -
हर झगड़े के बाद,
कभी वो इश्क जताए, कभी मैं उसे मनाऊं,
वो रूठ कर कभी दूर न जाए,
मैं उसके हर पल में साथ रहूं,
वो मुझे मैं उसे, अपने हर सुख दुख का साथी कहूं।
बस फिर ऐसे ही एक दूसरे में-
ये हसीन जिंदगी गुजर जाए।
वो जब मिल जाए-
तो हम किताबों की कहानियाॅं,
पूरी कर दिखाए ।।
By Prachi

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❤️😍😍
Beautiful poem 😍
👏👏