पर्व आज़ादी का
By Mr. Anil kumar mandal
हैं पर्व आज़ादी का हर घर में तिरंगा हो।।
उत्तर का हिम चोटी ।। उदयाचल बंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी … … … ..
सौराष्ट् हो पश्चिम का ।। या जलधि तरंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… … … … ..
पंजाब हो द्रविड़ हो।। या पूर्वी कलिंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी … .. … … … …
दक्षिण का दक्कन हो।। या कंचनजंघा हो।
हैं पर्व आज़ादी का हर दिशा तिरंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… … . … .. … ..
अंबर हो धरती हो।। या उड़ती पतंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी का इस रंग में रंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी … … .. … .. … .. .
सब पाये भात यहाँ।। हर तन पे अंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… .. … … .. … … .. .
जीते जी छत सबको।। मरने पे गंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… .. … .. … .. …
आपस में प्रीत रहे।। झगडा न दंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… .. … .. … .. … .
न जाति का हो चक्कर।। न धर्म का पंगा हो।
हैं पर्व आज़ादी… .. … .. … .. …
सर्वे शन्तु सुखिनः।। हर इंसा चंगा हो।
हैंपर्वआज़ादी… .. … ..
By Mr. Anil kumar mandal

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