परिणीता
By Rashmi Abhay
बस यूं ही एक दिन अचानक तुम्हारा, एक अधूरा स्पर्श छू गया था मेरे वजूद को सच बताऊं.. मेरा अधूरापन उस दिन हुआ था पूरा सुनो ना.. तुम्हें सिर्फ ये बताना है कि हे प्रिय.... ये एहसास बहुत हीं अद्भुत है एक परिणीता..एक गृहिणी से यूँ स्त्री में रूपांतरित हो जाना मेरा तुम्हारे एक अधूरे स्पर्श से एक पल में हीं पूर्ण हो जाना मेरा जैसे किसी मृत्य शरीर का अचानक 'जीवित' हो जाना अवर्णनीय है ये सुखद अनुभूति पता है मुझे....
उपभोग की वस्तु का जीवित होना सबको नागवार गुज़रता है इसलिए इसे मैंने सिर्फ तुमसे कहा है... तुम्हें बताया है.... जो तुम मुझे छू गए हो... मैं फिर से जीवित हो उठी हूँ सच कहूं तो मैं तुम्हें बिन छूए हीं छू सकती हूँ क्यूंकि अब मैं सिर्फ एक शरीर मात्र नहीं बल्कि मुझमें एक हृदय भी स्पंदित होने लगा है...।।
By Rashmi Abhay

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