परिचय
By Navneet Gill (नवनीत गिल)
अत्यधिक ठोकरें,
कहें, मिला जीवन से नजरें।
ला, कुछ नयापन,
सजा, फिर से सलौना मन।
"खिलौना" समझ,
ठुकराये कोई, नहीं उलझ।
भाग, तो कभी चल,
दे, पछाड़ कर सब विफल।
"मौन" से सिलना,
बेवजह परेशान न, होना।
लबों की ख़ामोशी,
की सुन केवल "सरगोशी"।
है यह दरख्वास्त,
अमूल्य, भगाती शिकस्त।
ठेस से ले, सबक,
सीख जीना फिर कसक।
अरे नादान बाशिंदे,
जलेंगे झूठी शान के परिंदे।
छोड़, "फ़ालतू" बातें,
करना मंज़िल से मुलाक़ातें।
आघात पे विजय,
पाकर, देना अपना परिचय।
प्रहार का हंसकर,
दो, जबाव बनकर "निडर"।
By Navneet Gill (नवनीत गिल)

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