परिंदे
By Akanksha Tiwari
कह परिंदे कुछ आवाज़ करते हैं
ये वक़्त के साथ कुछ नये खेल आज करते हैं
जीते हैं सभी कुछ शिकवे भुलाके
फिर ना जाने क्यों ये मरने का फैसला आज करते हैं
क्या हुआ होगा शोर इतना ही ज्यादा
जब दफन हुआ तू मेरे हिस्से का आधा
जल कर राख़ जब हुए तेरे ख्वाब
सोया जो तू हर पल थोड़ा ज्यादा
क्या उन परिंदो ने तुझे उकसाया था
जो तूने मौत को गले लगाया था
क्या उनकी आवाज़ों मे चुप गया तेरा शोर था
य तूने युहीं सुकून को अपनाया था
हार के बैठा था तू किनारे
य खुद की ख़ुशी से तूने उसे अपनाया था
लोगो के मुँह से सुना था मैंने तेरा वक़्त आया था
तेरे अच्छे कामो की वजह से भगवान ने तुझे कम उम्र मे बुलाया था
होगा क्या उन सपनो का जो तूने वक़्त पर सजाया था
क्या ये बात तुझे उस वक़्त याद आयी थी
जब मेने तेरे प्यार को अपनाया था
मौन होकर जो जवाब लेके आया है
कह परिंदे शोर आज करते है
अब ये हर सिलिसले के नाम से डरते है
By Akanksha Tiwari

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