परम ब्रह्म परमेश्वर।
Updated: Jul 16, 2025
By Satyamedha Kumar
हे जगतपति; हे जगतपिता
हे नारायण; हे परमपिता
जब सूखने बंधन तोड़ लिया।
विघ्नों ने नाता जोड़ लिया।
दर-दर की ठोकर खाकर के,
हम तेरे दर पे आए थे।
तब तूने गले लगाया था,
बिगड़े कामों को बनाया था।
जब दुनिया ने ठुकराया था,
तब तूने साथ निभाया था।
ईश्वर तेरा वह रूप मुझे,
हर पल चिंतन में आता है,
भक्ति का यह प्रेम का बंधन,
हरदम बढ़ता जाता है।
रिश्ते नातों के बंधन से,
भक्ति का यह बंधन अच्छा।
मूरत के भी रूप में मिलते हैं भगवान, जैसे मिल गए मीरा को श्री गिरधर गोपाल।
इनके हीं चरणों में मैं आत्म समर्पण करता हूं।
हर लेंगे सारे कष्टों को,
इतना विश्वास मैं करता हूं।
वो निराकार परमेश्वर जो असीमित क्षेत्र में फैला।
पाप पुण्य का लिए तराजू करता लेखा जोखा।
इनकी शरण में आ गए हैं तो किस बात का डर है।
अपने भक्तों की रक्षा का लिया इन्होंने प्रण है।
अब फर्ज हमारा बनता है,
दूस प्रवृत्तियों को त्यागे।
भक्त वत्सल उसे भगवान की शरणागत हम आ गए।
भक्त वत्सल उसे भगवान की शरणागत हम आ गए।
By Satyamedha Kumar

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