पत्रकारिता
By Yogesh Verma
मुद्दा एक, इनके अलग-अलग विचार हैं, आज का विषय, पत्रकारिता जनाब है। स्वयं को कहते, आम जनता की आवाज है, वास्तव में, राजनेता, व्यापारी, इनके सिर के ताज है।
पथभ्रष्ट को निमंत्रित कर, मेहमान-नवाज़ी की जाती है, क्या आपकी कमाई, उनकी पार्टी से आती है? धार्मिक मसलों को, चिंगारी से आग बनाना, इनकी कामयाबी है, शिक्षा, रोजगार की बात, बस, रह जाती है। जो बोले, स्वयं के हित के लिए, वह कैसा राष्ट्रवादी है? पूछो इनसे, क्या, धरने पर बैठा किसान आतंकवादी है? स्टार किड्स की चिंता, इन्हें सताती है? उसने क्या पहना, खाया, चर्चा का विषय बन जाती है। कोई पूछो इनसे, क्या सड़क पर खड़े बच्चों की, सूरत नजर नहीं आती है? मेरी मानो तो, पत्रकारिता से बेहतर, वेश्यावृत्ति कहलाती है, क्योंकि वह देश नहीं, जिस्म बेचकर खाती है।
By Yogesh Verma

Comments