नफ़रत कर तू इंसान बनेगा
By Akanksha Tiwari
नफ़रत कर तू इंसान बनेगा
भगवानों में भी भगवान बनेगा
सोई आंखे तब जागेंगी
जब एक दिन इनके लहू का कतरा भी
बलिदान करेगा
तालियों में छुप जाती
उसकी आँखे कुछ कहना चाहती
पर ये कहते कुर्बानी है
फ़र्ज़ की कीमत तो उसे चुकानी है
दस हज़ार भी ना मिलता हो उसको
पर वतन की ज़िम्मेदारी उसे उठानी है
चिंता मत करना
कहता हूँ तुमको
नाम तेरा महान बनेगा
तू चला जाएगा तेरे पीछे
परिवार का सम्मान बढ़ेगा
जाने वाला चला गया
अंतिम बेला मे भी वो आंखे मिल ना पाई
आये हैं बैठे हैं
दो-तीन दिन हम तुम्हारे चहेते हैं
लो आगया वो दिन
रिश्ते नाते कौन निभाते
सौदा हो गया पूरा है
नौकरी मिल जाएगी
लाख भी ले ही लेना तुम
अब चलते हैं कुछ जरुरत हो तो खुद ही
बांध लेना तुम
वो क्या है काम थोड़ा ज्यादा है
अच्छा पूछना तो भूल ही गए
वो कौन था जिसके सम्मान मे यहाँ आए थे
यही कहानी चली आ रही सदियों से
इसलिए कह रही हूँ सुनलो
नफ़रत कर इंसान बनेगा
भगवानों मे भी भगवान बनेगा
कर ले नफ़रत इस तंत्र सभा से
जिसका षड्यंत्र हर दिन महान बनेगा
कर ले नफ़रत इन् पैसों से
जिसके पीछे पूरी दुनिया कल बईमान बनेगा
कर ले नफ़रत इन घूरती आँखों से
इनका क्या सम्मान बढ़ेगा
होते इन् आँखों के हाथ नहीं है
इनमे इंसानो वाली कोई बात नहीं है
कर ले नफ़रत इन चलती जुबानो से
इनके घरों मे होता ना माँ बेटी का सम्मान है
बहार की माँ बेटियों पर इनका ही अधिकार है
कर ले नफ़रत उस प्यार से
जिसमे लिंग छुपा है आकर छुपा है प्रकार छुपा है
कर ले नफ़रत इन वस्त्रों के चहेतों से
जो हर किसी को निर्वस्त्र देखना चाहते हैं
कर ले नफ़रत उन् धर्म पुजारियों से
जो भूल गए धर्म का आधार ही एकता है
कर ले नफ़रत उन् व्यापारियों से
जिनका व्यापर ही सम्मान बन चूका है
कर ले नफ़रत तू अब खुद से
गलतियां जनता है पर मानता नहीं
मानता है पर सुधरता नहीं
सुधरता है फिर भूल क्यों जाता है
नफ़रत कर तू इंसान बनेगा
एक दिन तेरा वर्चस्व भी महान बनेगा
तेरे नाम का भी सम्मान बनेगा
तेरा कतरा- कतरा एक पहचान बनेगा
तेरे नाम से तेरे देश का नाम बनेगा
ऐसा ही मेरा भारत महान बनेगा
हमारे हिंदुस्तान का गौरव
उस दिन हमारा सम्मान बनेगा
नफ़रत कर तू इंसान बनेगा
भगवानों मे भी भगवान बनेगा।
By Akanksha Tiwari

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