: निर्धन की व्यथा:(मार्मिक गीत)
By Dr C M Gupta Atal
अपमानों ने अपनाया हूँ,कुंठाओं ने दुलराया हूँ।
फिर भी इतना जवाँ मर्द हूँ,कम रोया ज्यादा गाया हूँ।।
सुख से है सौ योजन दूरी,मुझसे ही है खुश मज़बूरी।
ऐसे जैसे बिन दहेज़ के,पड़ न सकी हों भाँवर पूरी।।
मैं उस सजी हुई दुल्हन की,जैसे टूटे मन काया हूँ।
अपमानों ने ...1
मुझसे ही है खुश लाचारी,नाच नाचती द्वारे ख्वारी।
जैसे किसी बाप के आगे,गर्भवती हो कन्या क्वारी।।
मैं तो उस जीवित से मुर्दे,बापू की निर्मम काया हूँ।
अपमानों ने...2
महफ़िल में पड़ गया गला हो,अपमानित हो गई कला हो।
या कन्धों पर अर्थी लेकर,इकलौते की बाप चला हो।।
मैं उस बूढ़े बापू की तो ,बुझी-बुझी करुणिम काया हूँ।
अपमानों ने...3
गीध न्याय हंसों को बाँटे,या कौआ कोयल को डाँटे।
अथवा बूढ़ी अंधी माँ को,बेटा मार रहा हो चाँटे।।
मैं उस पिटी हुई मइया की,बूढी सी बेदम काया हूँ।
अपमानों ने...4
मौलिक एवं स्वरचित-
राष्ट्रीय कवि डॉ सी एम गुप्ता
अटल,मो व व्हाटसप नं 9810995819
: निर्धन की व्यथा:(मार्मिक गीत)
अपमानों ने अपनाया हूँ,कुंठाओं ने दुलराया हूँ।
फिर भी इतना जवाँ मर्द हूँ,कम रोया ज्यादा गाया हूँ।।
सुख से है सौ योजन दूरी,मुझसे ही है खुश मज़बूरी।
ऐसे जैसे बिन दहेज़ के,पड़ न सकी हों भाँवर पूरी।।
मैं उस सजी हुई दुल्हन की,जैसे टूटे मन काया हूँ।
अपमानों ने ...1
मुझसे ही है खुश लाचारी,नाच नाचती द्वारे ख्वारी।
जैसे किसी बाप के आगे,गर्भवती हो कन्या क्वारी।।
मैं तो उस जीवित से मुर्दे,बापू की निर्मम काया हूँ।
अपमानों ने...2
महफ़िल में पड़ गया गला हो,अपमानित हो गई कला हो।
या कन्धों पर अर्थी लेकर,इकलौते की बाप चला हो।।
मैं उस बूढ़े बापू की तो ,बुझी-बुझी करुणिम काया हूँ।
अपमानों ने...3
गीध न्याय हंसों को बाँटे,या कौआ कोयल को डाँटे।
अथवा बूढ़ी अंधी माँ को,बेटा मार रहा हो चाँटे।।
मैं उस पिटी हुई मइया की,बूढी सी बेदम काया हूँ।
अपमानों ने...4
मौलिक एवं स्वरचित-
राष्ट्रीय कवि डॉ सी एम गुप्ता
अटल,मो व व्हाटसप नं 9810995819
: निर्धन की व्यथा:(मार्मिक गीत)
अपमानों ने अपनाया हूँ,कुंठाओं ने दुलराया हूँ।
फिर भी इतना जवाँ मर्द हूँ,कम रोया ज्यादा गाया हूँ।।
सुख से है सौ योजन दूरी,मुझसे ही है खुश मज़बूरी।
ऐसे जैसे बिन दहेज़ के,पड़ न सकी हों भाँवर पूरी।।
मैं उस सजी हुई दुल्हन की,जैसे टूटे मन काया हूँ।
अपमानों ने ...1
मुझसे ही है खुश लाचारी,नाच नाचती द्वारे ख्वारी।
जैसे किसी बाप के आगे,गर्भवती हो कन्या क्वारी।।
मैं तो उस जीवित से मुर्दे,बापू की निर्मम काया हूँ।
अपमानों ने...2
महफ़िल में पड़ गया गला हो,अपमानित हो गई कला हो।
या कन्धों पर अर्थी लेकर,इकलौते की बाप चला हो।।
मैं उस बूढ़े बापू की तो ,बुझी-बुझी करुणिम काया हूँ।
अपमानों ने...3
गीध न्याय हंसों को बाँटे,या कौआ कोयल को डाँटे।
अथवा बूढ़ी अंधी माँ को,बेटा मार रहा हो चाँटे।।
मैं उस पिटी हुई मइया की,बूढी सी बेदम काया हूँ।
अपमानों ने...4
मौलिक एवं स्वरचित-
राष्ट्रीय कवि डॉ सी एम गुप्ता
अटल,मो व व्हाटसप नं 9810995819
: निर्धन की व्यथा:(मार्मिक गीत)
अपमानों ने अपनाया हूँ,कुंठाओं ने दुलराया हूँ।
फिर भी इतना जवाँ मर्द हूँ,कम रोया ज्यादा गाया हूँ।।
सुख से है सौ योजन दूरी,मुझसे ही है खुश मज़बूरी।
ऐसे जैसे बिन दहेज़ के,पड़ न सकी हों भाँवर पूरी।।
मैं उस सजी हुई दुल्हन की,जैसे टूटे मन काया हूँ।
अपमानों ने ...1
मुझसे ही है खुश लाचारी,नाच नाचती द्वारे ख्वारी।
जैसे किसी बाप के आगे,गर्भवती हो कन्या क्वारी।।
मैं तो उस जीवित से मुर्दे,बापू की निर्मम काया हूँ।
अपमानों ने...2
महफ़िल में पड़ गया गला हो,अपमानित हो गई कला हो।
या कन्धों पर अर्थी लेकर,इकलौते की बाप चला हो।।
मैं उस बूढ़े बापू की तो ,बुझी-बुझी करुणिम काया हूँ।
अपमानों ने...3
गीध न्याय हंसों को बाँटे,या कौआ कोयल को डाँटे।
अथवा बूढ़ी अंधी माँ को,बेटा मार रहा हो चाँटे।।
मैं उस पिटी हुई मइया की,बूढी सी बेदम काया हूँ।
अपमानों ने...4
By Dr C M Gupta Atal

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