नारी मन की व्यथा
Updated: Jul 18, 2025
By Asha Rani Sharan
नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ
परिवार, समाज और राष्ट्र पर वारी हूँ
तो क्या मैं अपने आत्मसम्मान से हारी हूँ?
नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ
कहीं बेटी, कहीं बहन, कहीं सहचरी हूँ
और कहीं माँ हूँ बड़ी प्यारी,
बखूबी अपनी दायित्व निभायी
मुसीबतों में भी सुगम रास्ता बनायी
ना तुम्हें हारने दिया, और न स्वयं हारी हूँ
नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ
क्यों समझा मुझे दुर्बल और अबला?
क्यों मेरे अरमानों को कुचला?
हमने तो तुम पर अपना सर्वस्व लुटाया,
तुमने क्यों लिंग - भेद को नहीं मिटाया?
कहीं दामिनी सिसक रही है
तो कहीं, निर्भया दम तोड़ रही है
माता-पिता भी सिसक रहे हैं
दर-दर न्याय की भीख मांग रहे हैं,
कानून की कार्यवाही व प्रक्रिया
चली जा रही है चली जा रही है....
राजनीति तमाशा देख रही है,
विकृत मानसिकता वालों
करो अपनी सोच में समूल परिवर्तन
मैं आदर व सम्मान की अधिकारिणी हूँ
नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ
By Asha Rani Sharan

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