नर से बढ़कर नारी
By Pragati chauhan
एक नहीं दो-दो मात्राएं,
नर से बढ़कर नारी।- - - - २
कहीं मातृ रूपा है नारी, हमें जन्म देने वाली,
कहीं बहन पुनीता बनी, तो कहीं बनी यह घरवाली।
बन प्रेयसी कहीं जीवन में आई, कहीं काली बन
हुंकाई।
एक नहीं दो -दो मात्राएं,
नर से बढ़कर नारी।- - - - २
अमृत सम पय पिला के हमको करती ममता घट खाली।
अबला नहीं यह सबला है, त्यागमूर्ति कहीं आली।
आंचल ढापे रक्षा करती, कहीं जो संकट हो भारी।
एक नहीं दो -दो मात्राएं,
नर से बढ़कर नारी।- - - - २
राखी बांधे टीका करती, रोली चंदन ले थाली,
गुलशन को गुलजार करे, कर रखवाली बन माली,
बाहर आने दो इसको , रखो न धन चार दिवारी।
एक नहीं दो-दो मात्राएं,
नर से बढ़कर नारी।- - - - २
By Pragati chauhan

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