नमकीन रखा है
By Mudit Shukla
मेरी की हुई इबादत में थोड़ा यकीन रखा है,
मेरी दी हुई शहादत को थोड़ा हसीन रखा है।
के जब अपने कलेजे में मौत का डर विहीन रखा है,
तभी तो मैंने ये इश्क का खेल शौकीन रखा है।
तेरे साथ बिताए हुए समय को मैंने अब प्राचीन रखा है,
पर ना जाने क्यो तूने मुझे आज भी अपने अधीन रखा है।
तेरी उन यादों ने मेरे ख्वाब को आज भी रंगीन रखा है,
पर तेरी कमी ने मुझे इस अकेलेपन मे गमगीन रखा है।
उन लम्हों को सहेज कर अपनी कलम से अमीन रखा है,
तभी तेरी श्यारी को मेरे आंसूओं ने कागज पर नमकीन रखा है।
By Mudit Shukla

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