नन्ही जान
Updated: Oct 10, 2022
By Apurva Singh
में पापा ये आस लगाऊँ, देखूंगी कुछ और
फिर क्यों नहीं करते हैं यह सब
नन्ही जान पर गौर ।
ये नन्ही जान तेरा साथ न पाए
क्यों कुछ सब्र न आए
नंगे पाव क्यों चलते हैं कैसा सफर ये पाएं ।
सूरज की गठरी खोली तो अंदर रात है होती,
मैं अब पापा रोते-रोते किस आँचल में सोती ?
मेरे नैनों क्यों बुना जीवन का हसीन सपना
जब होने थे सब पराए
मिलना न था कोई अपना
दुनिया की इस छोटी सोच ने दिया मुझे है मार
बिन कुछ सोचे तुमने दे दी इस कोमल दिल को हार
एक ही कोख से जन्मे दो दिल आंक लिए दुनिया ने
जिगर का टुकड़ा होकर भी मैं ‘लाड़ला’ न बन पाई ।
मैं पापा ये आस लगाऊँ, देखूंगी कुछ और
फिर क्यों नहीं करते हैं यह सब
नन्ही जान पर गौर ।
By Apurva Singh

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