धर्म निरपेक्षता
Updated: Feb 14, 2024
By Asakti Srivastava
सृष्टि ने हमें बनाया, हमने खुदको नाम दिया...
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई का चोगा डाल लिया...
हर मसले को धर्म से जोड़, खुदका नुकसान किया...
इंसानियत से ऊपर तुच्छ मतभेदों को स्थान दिया...
धर्म के नाम पे मंच बन गये, पार्टियाँ बँट गईं...
दंगे-फ़साद आम हो गए, आपसी मिठास घट गईं...
शहर मोहल्लों के नाम बदले, गलियाँ छँट गईं...
कुछ की देश से, कुछ की नेताओं से उम्मीद हट गईं...
कुछ कहते हैं खुदको धर्म-निरपेक्ष, दूसरे को सांप्रदायिक...
दोनों ही नहीं कर पा रहे देश की इस समस्या को ठीक...
समाधान नहीं है, ना है भावनाओं का ही समान आदर इनको...
क्या बनाना चाह रहे हैं देश को धार्मिक संघर्षों क़ा प्रतीक...
देश की पहचान, देश के हर इक नागरिक से है...
हमें ही समझना, ऊपर उठना इस असमानता से है...
नेताओं की भाषा और संवेदनायें तो प्रत्यक्ष हैं सभी को...
हमारी जागरुकता, हमारा सर्व-धर्म-सम्भाव, हम से है…
By Asakti Srivastava

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