धरा की गोद
By Asheshwar Saw
बहुत दिन बीते चलो रो लेते हैं ।
तेरी यादों में जहां सपने ना हो अरमान ना हो लौट आने की खुशी में कुछ आंसू बहा लेते हैं
तुम्हारा हर एक कोना मुझे ही ढूंढता है ऐसा मैंने सुना है निराश हो जाते हो जब मेरी कुछ खबर नहीं आती है ।
शाम की दीयों के लौ में मेरा भी नाम आता है ।
बदले बदले से लगते हो उदासीन मायुसी छाई है क्या कोई नहीं है साथ तुम्हारे जो बातें करें दो वक्त गुजारे।
सुना है खनकती आवाज से बहुत मोहब्बत थी गाते थे गुनगुनाते थे साथ साथ।
बैठे रहते हैं अब भी बहुत सारे दोस्त तुम्हारे साथ दिन भर पर रिश्ते सभी से नहीं बनते ।
जब नैया इस जिंदगी की बीत जाए मेरी जब जब सांझ हो जाए, दो आंसू तुम भी बहा लेना शायद मैं अगले जन्म में आऊं तेरे ही पास चलो आज अरसों की बातें कर लेते हैं ।
By Asheshwar Saw

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