धन्य हूँ मैं
By Sarthak Bharti
आज मैं बड़ा आभारी हूँ, जीवन का हर पल धन्य हूँ। मेरे पास खाना है, पीना है, रोटी कपड़ा और घरी राहत है।
सबसे पहले तो आभार ईश्वर को, जिन्होंने दिया मुझे यह मंज़र। पिताजी-माताजी भाई बहन दोस्तों और गुरुओं का आभार बड़ा।
जीवन दिया मुझे प्यार से सही, आज सबको प्यार बांटने की क्षमता मिली। समय का मूल्य समझाया, कठिनाइयों से लड़ने की सामर्थ्य दिया।
धन्य हूँ मैं इस जिंदगी के लिए, जिसने दिया मुझे ये अनमोल तोहफ़ा। हर सुबह जगाती है नई उम्मीदें, हर रोज़ देती है नया सिखने का मौका।
इस जीवन का आभार असीम है, हर रोज़ नए दिन का स्वागत करूँ। हर क्षण का मज़ा लूँ, हर लम्हा को आंचल में छिपाऊँ, प्रतीक्षा और आशा के फूल बिखेरूँ।
धन्य हूँ मैं इस सूरज के लिए, जिसकी रोशनी मेरे दिल को भाती है। प्रकृति की सुंदरता में खोकर, हर दिन मिलता है अद्भुत साथी।
शान्त और स्वस्थ रहने का आभार है, चारों ओर की सौंदर्य से मोहित होने का आभार है। बहुत सारे सगे-संबंधियों को धन्य हूँ, जो मेरी ज़िन्दगी को धन्य बनाते हैं।
जीने की इच्छा को पूरा करने का आभार है, हर क्षण को खुशियों से भरने का आभार है। आप सबका आभारी हूँ, मेरे दोस्तों, जिन्होंने दिया जीने का ज़ाहिरा मुझे।
हर दिन को गुजारने का आभार है, हर पल को अपनी खुशियों से भरने का आभार है। मैं धन्य हूँ इस जीवन के लिए, इस प्यार भरे चक्रव्यूह में रहने के लिए।
धन्य हूँ मैं इस जिंदगी के लिए, जहाँ हर छोटी-छोटी खुशियां हैं महत्वपूर्ण। धन्यवाद इस जीवन के लिए, जिसने मुझे दी ये खास अद्भुत अनगिनत दौलत।
By Sarthak Bharti

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