दोस्ती और प्यार
By Shrishti Sahu
एक दिन प्यार और दोस्ती की मुलाकात हुई
बातों- बातों मे कुछ तो तकरार हुई
प्यार ने कहा दोस्ती से –
“जहा मैं हूँ वहा तुम्हारा क्या काम ?”
तो दोस्ती ने कहा-
“ जिन दो लोगों के दिलों को जोड़ते हों तुम
उन्हे मिलाता हूँ मैं
एक दूसरे के नाम से चिढ़ाता हूँ मैं
बात करने के बहाने सुझाता हूँ मैं
दोनों के बीच तुम्हें परवां चढा़ता हूँ मैं |
सरे आम जब तुम उसे बेइज़्ज़त करते हो
तो उसे उस बेइज़्ज़ती से बचाता हूँ मैं
तुम्हारे दिये उन आसुंओ को मिटाता हूँ मैं
बेजान सा हो जाए अगर कोई तो
जीने के अर्मां जगाता हूँ मैं
‘ये नहीं तो कोई और सही’
ये कहकर दिल बेहलाता हूँ मैं |
चेहरे पर उदासी कभी दिख जाए तो उसे हसाता हूँ मैं
लोगों के तानो से बचाता हूँ मैं
जमाने का आईना दिखाता हूँ मैं
फिर से प्यार करने के ख्वाब दिखाता हूँ मैं |
तुम्हारे आने के पहले भी उसके साथ था मैं
तुम्हारे जाने के बाद भी उसके साथ हूँ मैं
मरते दम तक साथ ना छोडूंगा
क्योंकि सच्चा दोस्त हूँ मैं |”
By Shrishti Sahu

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