दोस्त
By Pragati Ishwarchand Sahuji
भगवान ने सबके लिए बनाया है एक रिश्ता
दोस्त के नाम से जाना जाता है वो फरिश्ता
बचपन मे है दोस्ती, दोस्ती मे है जवानी
हर एक के ज़िंदगी में है दोस्तो की कहानी
मेरे भी है कुछ दोस्त करते है जो शैतानी
जिनकी बनी रहे मुझ पर उम्र भर मेहरबानी
स्कूल जाते थे दोस्तो के लिए
उनके बिन कहा थे रह पाते
चाहे कितने भी लढ ले झगड ले
पर रोज साथ मे ही थे टिफ़िन हम खाते
बचपन जाते जाते स्कूल के वो दिन भी चले गए
और वो सारे शैतान यार भी कही दूर बिछड़ से गये
होती है बाते आज भी उनसे पर वो
दौर ही थे जो हमेशा के लिए उड गए
कॉलेज जाने मे डर था थोडासा,
नई क्लास नये टीचर नया दोस्त होगा कैसा
पता चला तब डर से कुछ नही होता
सबको मिलता है जैसे को तैसा
पागल थे सब करते थे खुब मज्जे सारे
कोई गा लेता था सुरीला बाकी तो बस चिल्लर के थे मारे
जनाब दोस्त बिन अधूरी है जिन्दगी की सवारी
जिससे शेअर कर सके हम अपनी पूरी जानकारी
अगर हो जाए दोस्त को कुछ तो आ जाती है दिल मे बिमारी
पल सारे ठहर से है जाते क्युकी वो ही तो है हमारे सुकून की अलमारी
आस्माँ से बड़ी उम्र हो मेरे दोस्तो की
चीटि से भी छोटे हो दुख
समन्दर से बड़ी हो खुशिया उसकी झोली मे
ना बदले कभी खुशियो का रुख
ना लगा सकता कोई दाम कभी दोस्ती का
ये रिश्ता दुनिया मे सबसे है नेक
जानतकहाजिरकरसकतेहैउसकेलिएहेभगवानकभीहमसेतूमांगकरतोदेख
By Pragati Ishwarchand Sahuji

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