दोस्त
By Budhraj Singh Khinchi
किसी को दोस्त कहने से कोई दोस्त नहीं होता है।
खुदगर्ज़ इस दुनिया में जो बेगरज़ होता है वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने.............................
जो सिर्फ़ आपकी खुशियों में शरीक़ हो वो दोस्त नहीं होता है।
जो करुण हो दुःखों में आपके साथ जीता है वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने.............................
जो आपकी बात समझने का दम्भ भरता है वो दोस्त नहीं होता है।
जो बिन बताए आपके अहसास आपके भाव समझता है वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने.............................
जो वक़्त बेवक़्त ज़रूरत पड़ने पर काम आए वो ही दोस्त नहीं होता है।
जो आपको किसी की ज़रूरत का मोहताज़ ही ना बनने दे वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने से..........................
जो आपके साथ ख़ुश हो वो ही दोस्त नहीं होता है।
जो आपकी ख़ुशी से ही ख़ुश हो वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने से..........................
जो आपको पहचान ले वो ही दोस्त नहीं होता है।
जो बारिश से भीगे हुए आपके चेहरे में आँसु और पानी को अलग अलग पहचान ले वो दोस्त होता है।
किसी को दोस्त कहने से..........................
By Budhraj Singh Khinchi

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