दो बोल..
By Nazia Bano
सुन लूँ तो हर चिंता मिट जाये, जैसे उड़ते पंछी पिंजरे खोल मेरे दिन भर का ईंधन हैं उसके वो दो बोल…. दो बोल सुबह की किरणों जैसे शाम को ढलते सूरज जैसे रात सुहानी चाँद के जैसे जैसे ओस की बूंदों से भीगा कोई फूल ऐसे मुझको तर करते हैं उसके वो दो बोल मेरे दिन भर का ईंधन हैं उसके वो दो बोल...
दो बोल धूप में छांव के जैसे सर्दी में हलकी धूप के जैसे पतझड़ में है सावन जैसे तपते मौसम में जो बरसे वो बारिश अनमोल ऐसे मुझमें जीवन भरते उसके वो दो बोल मेरे दिन भर का ईंधन हैं उसके वो दो बोल…. दो बोल दुखों में सुख के जैसे कोई रूप को देखे छुप के जैसे शब्दों में इतना बल है ना समझे इनका मोल शब्दों का कंजूस है कर देता है टाल मटोल क्षण भर का जीवन हम सबका गिनी चुनी मुट्ठी भर साँसे, कोई जो हम में खुशियाँ ढूँढे कर लें उनसे जी भर बातें, उलझे थकते जीवन मे कुछ पल दुःख जाते भूल कोई जो अपना बोल ले मीठे प्यार के वो दो बोल मेरे दिन भर का ईंधन हैं उसके वो दो बोल..
By Nazia Bano

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