दो पल की जिंदगी
By Nishu Mehta
जिंदगी जिले इसे
क्या पता, कब कहाँ क्या मोड ले |
क्या पता, इस दो पल की जिंदगी का,
क्या पता, कब साथ छोड़ दे |
तू जिले दिल भर कर इस जिंदगी को,
क्या पता कब दम तोड़ दे |
आखिरी वक्त में ना होगा कोई तेरे साथ में
भूल जाएगा माँ पापा का प्यार,
सब छूट जाएगा यहीं पे |
पूरे कर ले सपने अपने, छू ले सारी ऊँचाइयाँ,
दिल में आए वो कर, घूम सारा जहाँ,
कुछ बाकी न रहे अफ़सोस को जी जिंदगी इस तरह |
जहाँ गम खुशियों का ठहराव है,
ऐसे जिंदगी जीते हुए नाव पार है |
By Nishu Mehta

Good work
The poetry is very well written. The rhythm, the rhyming scheme is perfect. Really well done. I love how beautifully the poem captures the truth of life
Your poem is a masterpiece of thought and feeling great work TRULY DESERVING!!!
Were you in a mood to make people cry by your words??
Amazing poem 👏
Reality written on page