दो दिख रहे पर दो है नहीं
By Deependra Srivastava
ना कुछ मै पाता हूँ ना मै कुछ खोता हूँ
ना मै मरता हूँ ना मै जीता हूँ
मै बस हूँ
मुझमे ही सारी सृष्टि नृत्य कर रही
मुझमे ही समा रही
मै होकर भी नहीं हूँ
मेरी अनंत सम्भावनाये सब योनियों मे व्यक्त हो रही
मै ही हूँ जगत मे दूजा कोई नहीं
मेरे ही सब प्रतिबिम्ब सारे
जो लगते एक होकर भी बहुत सारे
तुम भी मै
मै भी तुम
ये अहंकार की अभिव्यक्ति नहीं
प्रेम से जो कोई इस वर्णन को पढ़े वो भी स्वयं
यही है ये जान पाएगा
मै तुमसे अलग नहीं
तुम मुझसे अलग नहीं
हम दिख रहे दो , पर दो है नहीं
By Deependra Srivastava

Very good perspective