देश हमारा
By Hari Mohan Saxena
हमें धरा भारत की प्यारी,
कला संस्कृति जिसकी न्यारी
प्राचीन सभ्यता जिसकी सबसे,
और विविधता आली जग से।
धर्म अनेक सभी सहचारी,
सकल विश्व कुटुम्ब विचारी।
विश्व गुरु भारत की बानी,
प्रेम, शांति, दुनिया ने जानी।
नालन्दा ने ज्ञान प्रसारा,
वेदों ने आध्यात्म सिखाया।
दर्शन और विज्ञान हमारा,
जिसका जग ने लोहा माना।
भाषाओं का उद्गम जिससे,
योग और संस्कृत की जननी।
भू औ धरा का संगम जैसे,
देव भूमि, गुरुओं की स्थली।
कोटि नमन है भारत भू को,
ऋषि, मुनियों, हर संत, गुरु को।
करें प्रतिज्ञा देश प्रेम की,
अथक परिश्रम और प्रगति की।
मातृभूमि का कर्ज़ चुकाने
करदें अपना जीवन अर्पित।
इसकी रक्षा आन बान हित,
निज प्राणों को करें समर्पित।
By Hari Mohan Saxena

Inspiring poem. Motivates the reader for loving his / her own country and take pride in its heritage.