देश-प्रेमी के उदगार:(गीत)
By Dr C M Gupta Atal
मैं स्वदेश का प्रेमी जय भारत माता की बोलूँगा।
जन-जन के मन देश-प्रेम के भाव सर्वदा घोलूँगा।।
जिसकी गोद में पले बढ़े वो भूमि मेरी माता है।
एक प्राण दो देह सरीखा जैसा अपना नाता है।।
पड़ी जरूरत मेरी माँ को जान ख़ुशी से सौंपूँगा।
मैं स्वदेश का प्रेमी...1
रहे तिरंगा ऊँचा जग में यही मेरे अरमान है।
हिन्द तिरंगा मेरी माँ की आन-वान और शान है।।
बद्नज़रोँ से जो देखेगा उसकी नज़रें फोड़ूँगा।
मैं स्वदेश का प्रेमी...2
यही धरती है राम कृष्ण की और बुद्ध भगवान की।
पूज्यनीय और वंदनीय यह धरती सकल जहान की।।
यही धरा है अवतारों की सबकी गाथा खोलूँगा।
मैं स्वदेश का प्रेमी...3
वीरों की यह पुण्य भूमि जिस पर हमको सदा मान है।
वीर शिवा लक्षमी प्रताप से वीरों की यह खान है।।
यह माटी है ललित ललाटी इससे तन-मन धोलूँगा।
मैं स्वदेश का प्रेमी...4
देश बसे गद्दार देखते देश तोड़ने के सपने।
कुचल-कुचल नाकाम करूँगा इनके मंसूबे जितने।।
सारे देशद्रोहियों को मैं मार भगा के छोडूँगा।
मैं स्वदेश का प्रेमी जय भारत माता की बोलूँगा ---5
By Dr C M Gupta Atal

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