देर हो गई (Der Ho Gyi)
By Sameer Agarwal
जिस शख्स को ढूंढा मैंने अपने तन्हा हालातों में,
आज वो सज कर आया है मेरे आखिरी लम्हातों में,
अब कुछ पल की देरी है मुझको इस दुनिया से जाने में,
कहना उसको देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
कहना उसको उसकी ही यादों में शामें कटती थीं,
धड़कन उसको दूर जानकर के हंगामे करती थीं,
कहना बस इतनी जुस्तजू ही बाकी थी परवाने में,
कहना उसको देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
उसके आने की आस में मैं लम्हा लम्हा मरता था,
अपनी चौखट की हर आहट पर, लंबी आहें भरता था,
इतनी ही मय बची थी साकी इस टूटे पैमाने में,
कहना उसको देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
कर दी मैंने बर्बाद जिंदगी अपनी उसको पाने में,
फिर भी सबसे ज्यादा उसको मैंने चाहा ज़माने में,
उसे ना कहना उल्टा सीधा जब वो आए जनाजे़ में,
बस कहना उसको देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
मेरे खुदा क्यों देरी कर दी मुझ तक उसको लाने में,
अब तो कुछ पल ही बाकी है कंधों पर ले जाने में,
मेरे यारो कुछ पल रुक जाना मुझको दफनाने में,
यार मेरा जब आए सजकर बस थोड़ा सा मुस्काकर,
कहना उसको देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
मेरे पास ले आना उसको सर पर हाथ फिरा देना,
मेरी कब्र पर फिर से तुम उसका रुमाल गिरा देना,
जब पूछे वो जल्दी ऐसे क्यों की मैंने जाने में,
कहना उसको की देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
मेरे यार से कहना मैं जैसा था सच्चा आशिक था,
कोशिश की, कोई कसर न छोड़ी, मैंने प्यार निभाने में,
उससे कहना उसने कर दी बस एक खता अनजाने में,
कहना उसको की देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
जब रोए ना उसको रोने देना, तुम जरा ना उसको तड़पाना,
कसर ना रखना कोई बाकी तुम उसको हंसाने में,
पर ज़रा न करना देरी उसको फिर से याद दिलाने में,
कहना उसको की देर हो गई तुमको मेहरबां आने में।
By Sameer Agarwal

Comments