देख ले तू भी ख़ुदा
By Anjali Kumari
देख ले तू भी ख़ुदा, मैं डायरी सी हो गयी
स्याहियों के जैसे ही पन्नों में दब के सो गयी।
आज जब मैंने अचानक देखा ख़ुद की ओर है
आँखों में पानी छुपाए फिर रही थी, रो गयी।
मैं भटकती रह गयी आए न तुम इक बार भी
आओगे तुम ढूंढने, उम्मीद थी, सो खो गयी।
सोच कर इस बात को मैं रात दिन रोती रही
कल तलक तो सब सही था, बात अब क्या हो गयी।
साथ रहकर तेरे 'सादिक़' रहती थी ख़ुशरंग ही
याद कर उन हर दिनों को जाने क्यों मैं रो गयी।
By Anjali Kumari

अत्यंत सुंदर एवं प्रभावशाली कविता
Brave writing that deserves to be read and appreciate
wow yaar
It's beautiful ❤️
😌😌😌