दे देती है
By Mridul Krishna Tripathi
चाय मांगो तो सूप देती है
बातों के जवाब दो टूक देती है
अपने मन में मंतर फूंक कर
मेरे मन के जादू को धूप देती है।
सिर्फ, कहने को वो जात कि बनिया है
कभी लड़ कर देखो, तो मालूम चलेगा
आंखों से टक्कर क्या खूब देती है।
गुस्साता हूं तो लगाने के लिए
चोलियां का हुक्क देती है
भले ही वो जात कि बनिया है
मैं मांगू तो सब कुछ देती है।।
By Mridul Krishna Tripathi

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