दूर होकर भी पास….
- Hashtag Kalakar
- Sep 29, 2022
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By Hemant Katyan
अब अक्सर चाय की टपरी छोड़ के तुम्हारे पसंद बरिस्ता में कटिंग चाय की जगह कटिंग कॉफ़ी पी आता हूँ। तुम्हारी पसंद के महंगे कपड़े भी पहनने लगा हूँ। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करना भी छोड़ दिया है अब। यू हेट डेट न ? ज्यादा शांत-शांत का राग नहीं अलापता हूँ अब शोर में भी वक़्त बीता आता हूँ। तुम्हारे फेवरेट डिस्क में जाके डांस भी कर आया हूँ। इस बार अपने बर्थडे की पार्टी तुम्हारी पसंद के उसी महंगे लाउन्ज में की है जिसे हम दोनों में सिर्फ तुम ही अफोर्ड कर सकती थी। पासपोर्ट बनाने की अर्ज़ी दे दी है, शिमला की पहाड़ियों से तुम्हारे साथ सूरज को डूबते हुए देखने के सपने को छोड़कर तुम्हारे फेवरेट लंदन की सड़को पर घूमने के सपने संजोने जो लगा हूँ अब। ज़िन्दगी को अब जीने लगा हूँ बिलकुल वैसे ही जैसे तुम चाहती थी जैसे तुम्हे पसंद था।
लेकिन तुम्हारी सहेली बता रही थी की तुम अब शांत-शांत रहने लगी हो। बरिस्ता छोड़ के अक्सर चाय की टपरी पे चाय पी आती हो। शिमला जाके डूबते सूरज को भी देख आयी हो। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी सफर करने लगी हो। हाइजीन की परवाह न करते हुए सड़क पे ठेली वाले से भी खा लेती हो। रात में अक्सर सिविल लाइन्स उन सुनसान सड़को पे अकेली घूमती हो जिनपे कभी हम-तुम हमजोली हुआ करते थे और तुम अक्सर सुनसान सड़क देखकर मेरा हाथ पकड़कर अपने कंधे पर रख लिया करती थी। उसने बताया के तुमने लॉ छोड़ दिया है और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगी हो। शांति पसंद करने लगी हो। कम ही किसी से मिलती-जुलती हो। खोयी-खोयी सी रहती हो।
कही ऐसा तो नही न के जैसे तुम जैसा हो गया हूँ तुम भी मेरे जैसी हो गयी हो?
By Hemant Katyan

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