दुनियादारी
Updated: Jul 14, 2025
By Kavita Batra
कैसी दुनियादारी है ,
चाह रहे सभी वफादारी हैं ,
जहाँ जिस पल में होते हैं,
सभी रखते अदाकारी हैं ,
फिर भी चाह रहे, सभी वफादारी हैं।
ठोकर - ठोकर जब भी लगे ,
तो इल्ज़ाम , दुनिया पे भारी हैं,
क्यों नहीं कोई हक से कहता ,
कि कुछ तो , गलतियां भी हमारी हैं,
फिर भी चाह रहे, सभी वफादारी हैं।
अदाकारी में , भूल खुद को बैठें हैं,
बोलते ज़्यादा,और सुनना लगता भारी है,
समझने को नहीें सुनते हैं,
समझने को नहीें सुनते हैं,
बेसमझ में , रहते यहाँ सारे हैं,
फिर भी चाह रहे, सभी वफादारी हैं।
By Kavita Batra

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