दुनिया की फिक्र नहीं
By Jyotsna Kalkal
दुनिया की फिक्र नहीं तुम्हें
भीतर के बवाल से डरे बैठे हो
कुछ भी तो सही नहीं हो रहा
मुश्किल होते जा रहे जंजाल से डरे बैठे हो
ये अक्ल जो तुम्हें औरों से
अलग बनाती है अक्सर
क्या बात है कि ख़ुद पर
उसी की चाल से डरे बैठे हो
दौर ये भी कल आएगा नहीं
कहोगे जी ही लेते
सोचते हो मगर
फ़िलहाल से डरे बैठे हो
सूरज होना है तुम्हें तो
क्यूँ हो फ़िक्र सितारों की
हार अभी तो हुई नहीं देखो
तुम हार के ख़याल से डरे बैठे हो
By Jyotsna Kalkal

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