दुनिया
By Surabhi
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
आंखें फेर लेती है ये सच जो दिखा दो
बस झूठ के साये में जीती है ये दुनिया
सबकुछ बता कर दिल निकल के रख दो
बस अपना ही सोचना जानती है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
दर्द की चीख पुकार जो कभी इन्हें सुना दो
रुह की आवाज़ को अनसुना करती है ये दुनिया
जानती है ये गलत है फिर भी गलत को होने दो
बस अपने स्वार्थ से लिपटकर सो जाती है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
आंचल जो खींच गया कभी दामन में छींटे पड़ने दो
गलती है ये बस तुम्हारी अब अग्नि परीक्षा लेगी ये दुनिया
इनके इन्सां को जागा कर कोई इन्हे इंसान बना दो
वार्ना अब किस काम की बची है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
ग़र सच में खुदा का ख़ौफ़ होता इन्हें
तो यूं मतलबी न बनती ये दुनिया
मैले मन को कोई अब असली दर्पण दिखा दो
धर्म का तो बस व्यापार करती है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
इश्क तो बस अब क़िताबों क पन्नो में रह गया
एक था मजनूं जो अपनी लैला पे क़ुर्बान हो गया
अरे जनाब! इन किस्सो को बीते एक मुकाम हो गया
ग़र कह दे कोई आके प्यार करता हुं मैं तुझसे
सोचना मत ख्यालों में ज्यादा खोना मत
मुहब्बत के नाम पर जिस्म का व्यापार करती है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
ये जो समाज है रस्म और रिवाज़ है
ये इतने बड़े है कि इन्सानियत से भी परे है
ग़र कभी ग़लती से इश्क हो भी जाए
किसी की आंखों में ये धड़कने खो भी जाए
फिर अपना असली रंग दिखायेगी ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
समाज के ठेकेदार जो राधा-कृष्ण को पूजते है
प्रेम के नाम से जाने क्यों मुंह फेरते है
जज्बातों का गला घोंट कर और तुझको तोड़कर
शादी के नाम पर दिखावे का कारोबार करती है ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
रूह बेचैन और उम्मीद है छूटी हुई सी
फिर भी तू चलना यूँ ही मुस्कुराती हुई सी
क्योंकी दिखावे पर ही अब चलती है ये दुनिया
ये वादे ये कस्मे और ये रिश्ते नाते
सब तेरे ही है और तेरे साथ चलेंगे
पर जो कभी तूने इन्से उम्मीद लगाई
और अपने दर्द के किस्सों की आहटें सुनाई
वादो से मुक़र कर तुझको छोड़ कर
आगे निकल जायेगी ये दुनिया
तू सोचता रह जायेगा ये क्या हुआ
तुझको यूँ ही भूल जाएगी ये दुनिया
जला दो ये दुनिया अब धुएं में उड़ा दो
नहीं काम की अब मिटा दो ये दुनिया
By Surabhi

Comments