दुखी है मेरा दिल, पर क्यों?
By Sushant Saurabh
आसमां में सजे तारें हैं
स्वप्न में खोए मेरे प्यारे हैं
दुखी है मेरा दिल,
पर क्यों?
चंद्रमा का अरुण कपाट है
जिंदगी दौड़ रही सपाट है
दुखी है मेरा दिल,
पर क्यों?
बीत गया, ये आखिरी पहर है
रोशनी से जगमग शहर है
दुखी है मेरा दिल,
पर क्यों?
भोर की किरण, दरार से भीतर आई है
झोली में भरके सौगात लाई है
अंत हुआ दुख,
पर अन्नविज्ञ रह गया क्यों
By Sushant Saurabh

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