दीवार
By Sarthak Gupta
वो मेरे कमरे की ही एक दीवार थी,
जो हमेशा मेरे साथ थी।
आज तक कितनों ने मेरे इस दिल को तोड़ा,
पर बचपन से ही उसने मेरा साथ कभी ना छोड़ा।
में हस्ती थी खेलती थी,
उस दीवार पर ही अपने किस्से बुनती थी।
मेरा हसना मेरा रोना उसने है देखा,
उसी के सहारे मैने ज़िंदगी जीना सीखा।
मुझे सबसे अच्छे से जानती थी, थी वो मेरी यार,
आज सिर्फ यादों मे रह गयी मेरे कमरे की वो एक दीवार।
By Sarthak Gupta

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