दीदार अंतर्मन का
By Suman Rai
अंतर्मन का जबसे दीदार कर लिया, समस्त ज़िंदगी से साक्षात्कार कर लिया
जियो और जीने दो प्रकृति मानो पुकार रही है
पर्यावरण की सुरक्षा को नियति स्वीकार रही है
संकल्प शक्ति से लक्ष्य का आह्वान कर दिया, समस्त ज़िंदगी से साक्षात्कार कर लिया
यूँ ही नहीं संत अमरत्व पा गए,
सत्यता और ज्ञान का अमृत जो दे गये
दी उम्मीद की चिंगारी भी , सभी ने फक्र है किया, समस्त ज़िंदगी से साक्षात्कार कर लिया
अहंकार को हटा जब मानव हित के कर्म किए ,
धर्म को विकसित किया , उन्नति के दरवाज़े खुले
मुश्किलों से लढ़ने का जैसे हुनर पा लिया, समस्त ज़िंदगी से साक्षात्कार कर लिया
By Suman Rai

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