दिल में आके बस गई है वो
Updated: Jul 28, 2025
By Deepak Mananda
पहले दिन उसको देखा था, तो ख्वाब नैन में पल बैठा था,
धड़क-धड़क दिल उछला मानो, इक एहसास मैं पा बैठा था।
सुनी थी दिल ने आहट भी, चाहत पाने को तरसा था,
खुशबू बातों में, नजाकत भी, उसका अफसाना कह बैठा था।।
दिल उमंग-उन्माद भरा, मानो कुछ आके कर गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
आलम मेरा खामोशी का, मदहोशी में डूबा-डूबा था,
ख्याल उसी के, ख्वाब सजे, बहार भरा मंसूबा था।
मुस्कान लबों पे भीगे से, आँखों में शरारत झलकी थी,
चेहरा मासूम अदाएँ कातिल, प्यार में उसके डूबा था।।
मुझे नहीं मेरी है खबर, शायद कुछ आके कह गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
वह दिन मुश्किल से गुजरा था, मानो अरसों तक फैला था,
चैन नहीं बेचैन था दिल, मांगी मन्नत तब सम्हला था।
इक चेहरा आइने में आए, मानो जन्नत हो शीशे में,
दूँ दस्तक तो खो जाए, हर बार यही, फिर उबला था।।
दे मारा शीशे को मुक्का, लगा रूठ के चल गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
दिल ने तनहाई में ढूंढा था, ख्वाबों में उसे सजाया था,
पाया जीवन महफूज ही था, आँखों में उसे बसाया था।
साँसों में बड़ी बेकरारी थी, दिल के आगे उसकी तसवीर,
अदाएँ उसकी, बातें, नैन, रग-रग में मेरे समाया था।।
जन्नत पाया, पाया चाहत, मानो कुछ आके सज गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
बेताब मैं था चाहत में डूबा, पागल इश्क को पाने को,
गहराई में डूबी थी धड़कन, धड़के एहसास को पाने को।
लिपटा गुलाब में शमा रहा था, फिजा सुहानी हो चली थी,
साँस मेरी बढ़ती जाती, होंठों पे उसके चुमने को।।
बरस रहे सपनों के फूल, खुशी के सावन बन गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
मैं सोचूँ हर पल जब उसको, पल, पल थम से जाते थे,
अरमाँ प्यारे, दिल उड़ा फिरे, बिन डोर ऊंचे जाते थे।
जोर नहीं मेरा था दिल पे, नजर उसे बस वो आती,
इरादे कातिल, शरारती भी, मानो कई धड़के जाते थे।।
कसक जगी दिल में ऐसी, मानो महबूबा बन गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
सजा इश्क का खिला कारवाँ, रंग दिशाओं में चमका था,
नूर की चादर तन गई थी, माहौल खुशबू से महका था।
हुआ नजारा दिलनशीन भी, रुत प्यारी रोशन थी,
हाल मेरा बेहाल वहाँ, दिल की पुकार पर बहका था।।
मानो दरिया वो प्यासा था मैं,तनिक भिगोकर चल गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
दिल मेरा लगता न कहीं, खोया खुद में रहता था,
लबों पे नाम धरा था उसका, सुबह-शाम रट्टा करता था।
सफर मोहब्बत का जालिम, काँटों से भरा दिल सम्हला था,
समझाया कि कठिनाई डगर में, तो मुसका करता था।।
कहता मजा इसी में है, जीने का सहारा बन गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
महसूस करुँ उसको भीतर, मीठे एहसास जगा गई थी,
अक्स बसा प्यारा आँखों में, नाम वो मेरे कर गई थी।
मेरा मानो हो दिया साथ, जन्मों तक थामा मेरा हाथ,
मानो बाँहों में लिपटी हो, ऐसा जादू कुछ कर गई थी।।
मन मेरा बावरा हुआ, उम्मीद गुलाबी जगा गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
दिल दीवाना खता है क्या, जोर से धड़के करे भी क्या,
इक अफसाना गाया था, हो जाए फना रब करे क्या।
सजनी को एक सिफारिश है, फरियाद भरी एक ख्वाहिश है,
दिल मांगे तेरा दान प्रिये, हो जाएँ एक अब दूर हो क्या।।
जान मैं दूँ तुम जवाब दो, खामोशी से कुछ कह गई है वो,
दिल में आके बस गई है वो।
By Deepak Mananda

Comments