दिल की दस्तक !
By Shivshankar Santosh Patwa
अपनी सीमा के बाहर तो मैं जा भी नहीं सकता
अब ज़िद पर अड़े आँसू छिपा मै भी नहीं सकता
ये कैसी बात करते हो, क्यों राहें अब अलग होंगी
मै भूला रास्ते सारे कहीं जा भी नहीं सकता
ये ज़ंजीरें बड़ी है सख़्त गर्म कर भी ना छूटेगी
छूटकर भी लगा जो दाग मिटा मै भी नहीं सकता
मै बेचारा न था, खुश था, मगर अब हाल ऐसा है
तू ना केह दे तो ना ही है मना मै भी नहीं सकता
बता जो भी इशारा हो मगर ये सोचकर कहना
तेरे दिल में मेरी दस्तक, मिटा तू भी नहीं सकता।
By Shivshankar Santosh Patwa

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