दिया और बाती
By Poorvi Joshi
दिये ने बाती से कहा
तुम क्यों इतना शर्माती हो
जल्दी क्यों नहीं मिलने आती हो
तड़पता रह जाता हूं
कहीं जगमगा भी नहीं पाता हूं
बाती मुस्कुराई
इतना जल्दी तो आती हूं
पर बिना तेल के तुझे मिल ना पाती हूं
मेरी भी मजबूरी है
तेरे साथ खुशी से जलने के लिए
तेल बहुत जरूरी है
हालांकि फिर मे बच नहीं पाऊंगी
पर तेरे कुछ पल के साथ से
किसी के तो काम आऊंगी
जो थोड़ा सा रोशनाऊंगी
बस तेरी बाती बन जाऊंगी
फिर से मिलने आउंगी
फिर से मिलने आउंगी
By Poorvi Joshi

Great thought..
Heart touching poem
Very Good 😊
Very nice poorvi