दिए की लौ
Updated: Oct 8, 2022
By Neha Anand
कल देखा,
गौर से देखा मैने, उस छोटी सी लौ को
अंधेरे के सामने डट कर खडे उस दिये को
ना अपने कद की शर्म उसे
ना डर काली स्याह में खो जाने का
जल के मिली राह उसे रात ने भी किया सलाम उसे इक हाथ पे हाथ धरा मैं ही बैठा रहा डरता रहा, कुढता रहा राह तो मेरे कदमो के नीचे ही थी, सौ बहाने बनायें मैं रोता रहा अपने 'कारीगर' को शर्मिन्दा करता रहा
By Neha Anand

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